तुम बात करो तो ...

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तुम बात  करो तो बात चले 
चंदा दूल्हा , निशि परिणीता
और तारों की बारात चले
तुम बात करो तो बात चले 

कुछ उन सपनों की बात करें 
जो मिलकर हम-तुम बुनते थे 
कुछ उन गीतों  की बात कहें 
जो साथ-साथ हम चुनते थे 

वो चूर हुए तो होने दो 
जो बीत गयी सो बीत गयी 
नूतन इक स्वप्न ज़रा रच दो 
फिर से फूलों की रात चले 
तुम बात करो तो बात चले 

क्या उन पृष्ठों की बात करूँ 
जो कोरे , कहीं अधूरे हैं ?
या उन अधरों की कथा कहूँ 
जो हंसना अब तक भूलें हैं ?

स्मित रूठा है, तो जाने दो 
जो भूल गया सो बिसर गया 
 तुम कलम उठा कुछ  जो लिख दो 
तो स्वर्णिम नवल प्रभात चले 
तुम बात करो तो बात चले 


How it feels when we feel love slipping from our hands, when we can actually see loved ones drifting apart despite our best intentions?

 A desperate try to woo them back, will it work?

 Perhaps, being an optimist, discerning a silver lining in every dark cloud, masking hurts with smiles, steering clear from dark feelings even in poetry, so much of composure is a fault.

But, a deep reading will portray the yearning of the soul.

If only we can take our words back. If only we can erase the memories... 

If only you won't be mum and say something , anything, everything will be fine again! It's better to live with  scars than with seeping wounds. 
Tum baat karo to baat chale ....  




निशि  - night ,  परिणीता - bride  , स्मित - smile,  नवल प्रभात - a new dawn  

जाते जाते

हिमबिंदु का जाते जाते
रवि किरणों  से होना झिलमिल
सुरभित कर जाता है जग को
जाने से पहले मलयानिल

 दीपक की लौ में प्रेम - शलभ
गाता  विदग्ध होने से पूर्व
तारक दल मिटने से पहले
आलोक-चित्र रचता अपूर्व

ढलते- ढलते  संध्या नभ का
स्वर्णिम कण -कण कर जाती है
झरने से पहले पुष्पलता
विहँस-विहँस इठलाती है

 मेरे  लघु जीवन में किन्तु
अनुपम नहीं  बिम्ब कोई ऐसा
साधारणता  से सज्जित यह,
प्रतिपल बुझती लौ  के जैसा

जीवन के रंगमंच पर जब
अंतिम उत्सव की हो बेला
मेरे जीवन की असफलताओं से
तुम पाठ सफलता पढ़ लेना

मुझ मूढ़मति की चूकों पर
हंस, कर लेना मन को उन्मन
नहीं निधि अन्य बस, भाव-सुमन
स्वीकार करो इनका अर्पण


There's no life which is wasted . Even those considered  unsuccessful are lessons in what not to sow ! 
There's no such thing as dearth. We all have a little compassion to bestow!
There's no such thing as sorrow unless we want it to be . Even love un-returned has its own rainbow !


हिमबिंदु - dewdrops ,  मलयानिल - scented breeze from the Malay Mountains  , शलभ  - moth,  मूढ़मति - silly, stupid ,  उन्मन -   lively