जाने कैसे

मार्ग था सीधा सरल, 
संतोष धन, आशा सखी
ज्ञान दीपित, प्रेम प्लावित, 
वीथियाँ करुणामयी...
जाने कैसे पथ ये तुम तक मुड़  गया 

चाँद सा खिलता निशि में 
सूर्य सा सोना उगलता 
पवन से भी तीव्रतर मेरा 
हृदय ऐसे  विचरता 
जैसे खुले नभ में उड़ा जाए 
अकेला एक पंछी ...
जाने कैसे फिर ये तुमसे जुड़ गया 

सीखा मेरे मद से 
भंवर ने गुनगुनाना 
हास से फूलों ने सीखा 
खिलखिलाना 
और मेरे कण्ठ से 
मधुमय सुधा सा राग फैला ... 
फिर भी मन तितली सा मचला, उड़ गया? 

सुनहरी लकदक से सज्जित
कुछ सुधामय बोल मीठे
था प्रथम, था नया अनुभव 
बुन लिए कुछ स्वप्न झूठे 
जाल सम्मुख देख कर भी, 
बस फुदकना डाल पर उस
नेह का बंधन ये ऐसा पड़  गया।

निस्तब्धता में स्वर,
वही, गुँजार सुनना
और रव में मौन-स्मित
उपवास रखना 
जान कर भी यूँ
बधिक की राह तकना...
श्वास की गति तक ये क्रम अब पड़ गया..

जाने कैसे पथ ये तुम तक मुड़ गया।







Image: watch this beautiful movie on an unusual friendship here

वीथियाँ  करुणामयी - lanes of compassion.                मद- flamboyance
निस्तब्धता - silence, solitude 
रव - frolic, noise
बधिक- executioner, slayer                             श्वास की गति- till the last breath                              क्रम- routine

4 comments:

  1. Main aapke shabd-chayan mein aisa uljha ki bhaav se bhatak gaya:)
    ADBHUT!!

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    1. आशा है कि कला-पक्ष ने भाव-पक्ष को निराश नही किया हो, भावाविष्ट हुए बिना कला थोथी है। Perhaps, in an effort to guard privacy it has turned out a bit cryptic..am glad you appreciated nevertheless!

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  2. बहुत ही सुन्दर शब्द कोकिला ! मैं भी अमित जी से सहमत हूँ! शब्दों का चयन, लय, प्रवाह, कलापक्ष, भावपक्ष सब कुछ अत्युत्तम ! प्रशंसा के लिए शब्द काम पड़ रहे हैं !

    You are simply awesome! The way you can emote bilingually is commendable .

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    1. Thank-you so much Sangeeta ji..You always motivate.. ALWAYS! And I a
      feel a genuine happiness in your comments which is Priceless! Glad to have you as a loving reader!

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